चकरदा जलाशय होने के बावजूद पानी के लिए तरस रहे किसान, धान की फसल पर संकट
1 माह से बारिश नहीं, नहर जाम होने से सिंचाई बाधित; कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन के बाद भी समाधान का इंतजार
सरसींवा – सरसींवा अंचल में पिछले 1 माह से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। तेज धूप और गर्मी से खेतों की नमी सूखने लगी है, जिससे धान की फसल पर संकट मंडराने लगा है। वहीं, सरसींवा तहसील से लगे ग्राम चकरदा में जलाशय होने के बावजूद नहर जाम होने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे करीब 30 एकड़ में लगी धान की फसल प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
किसानों के अनुसार, नहर में मिट्टी जमा होने और चुहरी खार मार्ग पर बने पुल के नीचे पानी का प्रवाह बाधित होने से जलाशय का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पा रहा है। वर्तमान में धान की फसल में बालियां निकलने का समय है, ऐसे में पर्याप्त पानी की आवश्यकता है। बारिश नहीं होने और सिंचाई व्यवस्था ठप रहने से किसानों के सामने फसल बचाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
कलेक्टर जनदर्शन में आवेदन, फिर भी कार्रवाई का इंतजार
नहर की सफाई, मरम्मत और पुल के नीचे जमा मिट्टी हटाने की मांग को लेकर किसान पूर्व में जिला कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के जनदर्शन में आवेदन दे चुके हैं। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
एक ओर बारिश की बेरुखी और दूसरी ओर जलाशय का पानी खेतों तक नहीं पहुंचने से किसानों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। जलाशय में पानी उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग सिंचाई के लिए नहीं हो पाना किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
वैकल्पिक साधनों से फसल बचाने की कोशिश
सिंचाई की समस्या से जूझ रहे किसान तालाब, डबरी और अन्य जलस्रोतों से पानी की व्यवस्था कर अपनी फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इन वैकल्पिक साधनों से सभी खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचाना आसान नहीं है।
प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
किसानों ने जिला प्रशासन और संबंधित सिंचाई विभाग से नहर की तत्काल सफाई एवं मरम्मत कराने, पुल के नीचे जमा मिट्टी हटाने तथा पानी का प्रवाह सुचारु कर चकरदा जलाशय का पानी खेतों तक पहुंचाने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि धान की फसल के इस महत्वपूर्ण चरण में समय पर सिंचाई नहीं मिली, तो उत्पादन प्रभावित हो सकता है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। अब किसानों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिरने की आशंका है।











