मनरेगा में फर्जीवाड़ा कब रुकेगा? मजदूरों तक पूरा लाभ क्यों नहीं पहुंच पा रहा?

मनरेगा में फर्जीवाड़ा कब रुकेगा? मजदूरों तक पूरा लाभ क्यों नहीं पहुंच पा रहा?
सरसीवा – महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का उद्देश्य ग्रामीण मजदूरों को उनके गांव में ही रोजगार उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें पलायन न करना पड़े और आर्थिक सुरक्षा मिल सके। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि योजना का वास्तविक लाभ जरूरतमंद मजदूरों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है।
कई पंचायतों में फर्जी हाजिरी और मास्टर रोल में अनियमितताओं के कारण मनरेगा की राशि का दुरुपयोग हो रहा है। आरोप यह भी हैं कि कुछ स्थानों पर जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली लोगों द्वारा अपने परिजनों के नाम पर मास्टर रोल में उपस्थिति दर्ज कराई जाती है। कई मामलों में सुबह कार्यस्थल पर पहुंचकर केवल फोटो खिंचवाने के बाद नाम दर्ज करा लिया जाता है, जबकि वास्तविक मजदूर पूरे दिन कार्य करने के बावजूद उचित लाभ से वंचित रह जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा में कार्यरत वास्तविक श्रमिकों की जगह कागजों में फर्जी हाजिरी दिखाकर भुगतान निकाले जाने की शिकायतें लंबे समय से मिलती रही हैं। इससे योजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि सरकार ने ऑनलाइन मस्टर रोल, जियो टैगिंग, आधार आधारित भुगतान और मोबाइल मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं, लेकिन इसके बावजूद अनियमितताओं की शिकायतें पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी हैं।
ग्रामीणों का मानना है कि यदि नियमित निरीक्षण, सामाजिक अंकेक्षण (सोशल ऑडिट) और शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, तो फर्जीवाड़े पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। उनका कहना है कि मनरेगा का लाभ केवल वास्तविक मजदूरों तक पहुंचे, तभी योजना का मूल उद्देश्य सफल माना जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मनरेगा की राशि वास्तव में उन गरीब और जरूरतमंद मजदूरों तक पहुंच रही है, जिनके लिए यह योजना बनाई गई है, या फिर फर्जी हाजिरी और अनियमितताओं के कारण इसकी मूल भावना प्रभावित हो रही है?
यह प्रश्न आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसका उत्तर केवल पारदर्शी क्रियान्वयन, प्रभावी निगरानी और प्रशासनिक कार्रवाई से ही मिल सकता है।