चकरदा जलाशय की नहर में जाम और पुल के गलत निर्माण से 30 एकड़ धान की फसल पर संकट
किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत, नहर की सफाई और पुल की मरम्मत कराने की मांग
चकरदा/सरसींवा, तहसील सरसींवा, जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़। ग्राम चकरदा में जलाशय की नहर में मिट्टी जमा होने, नहर के क्षतिग्रस्त होने और चुहरी खार मार्ग के मुख्य सड़क पर बने पुल के निर्माण में कथित गड़बड़ी के कारण किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि नहर में पानी का उचित प्रवाह नहीं होने से करीब 30 एकड़ कृषि भूमि में लगी धान की फसल प्रभावित होने की आशंका है। इस समस्या को लेकर ग्रामीणों एवं किसानों ने जिला कलेक्टर, सारंगढ़-बिलाईगढ़ के नाम आवेदन देकर जल्द सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की है।
नहर में मिट्टी जमा, सफाई नहीं होने से सिंचाई प्रभावित
आवेदन में किसानों ने बताया कि ग्राम चकरदा स्थित जलाशय की शाखा नहर एवं चुहरी खार मार्ग की नहर में मिट्टी जमा होने से पानी का प्रवाह बाधित हो रहा है। नहर की नियमित सफाई नहीं होने के कारण किसानों को सिंचाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसानों ने नहर की साफ-सफाई कराने और आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है।
पुल निर्माण में गड़बड़ी का आरोप
ग्रामीणों ने आवेदन में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत कोदवा से चकरदा पहुंच मार्ग पर मुख्य सड़क के क्रॉसिंग स्थल पर बने पुल का निर्माण सही तरीके से नहीं किया गया है। पुल के नीचे मिट्टी जमा होने से नहर में पानी की निकासी एवं प्रवाह प्रभावित होने की बात कही गई है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो धान की फसल को नुकसान हो सकता है।
मुख्य नहर भी कई जगह क्षतिग्रस्त
किसानों के अनुसार, मुख्य नहर कई स्थानों पर टूटी हुई है, जिससे पानी की बर्बादी हो रही है। नहर की मरम्मत नहीं होने के कारण खेतों तक पर्याप्त पानी पहुंचने में दिक्कत आ रही है। ऐसे में नहर की सफाई, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और पुल के नीचे जमा मिट्टी हटाने की आवश्यकता है।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
किसानों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि मामले की स्थल जांच कराकर नहर की सफाई, क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत और पुल के नीचे जमा मिट्टी हटाने की व्यवस्था जल्द की जाए, ताकि किसानों की धान की फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग किसानों की इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं और सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कब तक आवश्यक कदम उठाते हैं।













