छत्तीसगढ़

परिसीमन विधेयक 2026 पर संसद में कमलेश जांगड़े का वक्तव्य: नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम

परिसीमन विधेयक 2026 पर संसद में कमलेश जांगड़े का वक्तव्य: नारी शक्ति को सशक्त बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम

सरसीवा – विगत दिवस संसद में परिसीमन विधेयक 2026 एवं उससे संबंधित संशोधन विधेयकों पर हुई महत्वपूर्ण चर्चा के दौरान जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े ने अपने विचार प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक मात्र एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक भविष्य को सशक्त बनाने वाला एक ऐतिहासिक प्रयास है, जो विशेष रूप से नारी शक्ति को नई दिशा देने का कार्य करेगा।
अपने वक्तव्य में उन्होंने संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा—
“मैं किसी समाज की प्रगति को उसमें महिलाओं की स्थिति से मापता हूँ।”
उन्होंने कहा कि यह विचार आज भी उतना ही प्रासंगिक है और हमें सही दिशा प्रदान करता है।
भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति, नेतृत्व और सृजन का आधार माना गया है। इतिहास इस बात का साक्षी है कि हर युग में महिलाओं ने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, किंतु राजनीतिक प्रतिनिधित्व में उनकी भागीदारी अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है।
इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक क्रांतिकारी पहल है, जो लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब आवश्यक है कि इस प्रावधान का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए, ताकि महिलाएं निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकें।
श्रीमती जांगड़े ने कहा कि यह पहल केवल आरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और सशक्त लोकतंत्र की मजबूत नींव है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शिक्षा, स्वास्थ्य, जल प्रबंधन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में अधिक संवेदनशील एवं प्रभावी निर्णय सामने आते हैं।
उन्होंने पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी के सकारात्मक परिणामों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि यही सशक्त भागीदारी संसद और विधानसभाओं में भी दिखाई दे।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं की सहभागिता से निर्णय प्रक्रिया में संवेदनशीलता, संतुलन और समावेशिता आती है, जो समग्र विकास को गति देती है।
अंत में उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को केवल ‘वोट बैंक’ नहीं, बल्कि ‘निर्णायक शक्ति’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे महिलाओं के अधिकार, सुरक्षा और सम्मान से जुड़े मुद्दों को और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि इस ऐतिहासिक पहल को धरातल पर उतारने के लिए मिलकर प्रयास करें और महिलाओं की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करें।

 

 

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